ज़िन्दगी में जो ख़ुशी मिली है ए दोस्त,
बिन तेरे उस खुशी का क्या करूं…..
उसमें मुझे तेरा साझा भी चाहिए।
साझा
Comments
20 responses to “साझा”
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बहुत ही बेहतरीन पंक्तियाँ हैं। भावगत विशेषता के साथ कलापक्षीय सौंदर्य अद्भुत है। वाह।
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सुन्दर समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी । आपका बहुत बहुत शुक्रिया सर 🙏
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आपका जबाब नहीं। बेहतरीन पंक्तिया
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Thanks for your valuable compliment Isha ji.
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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धन्यवाद जी
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बहुत खूब
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏
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बहुत सुंदर पंक्तियों के सृजन किया है आपने। बहुत खूब
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आपकी इस टिप्पणी का तहे दिल से शुक्रिया कमला जी🙏
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मित्रता के महत्व को प्रतिपादित करती बेहतरीन lines। बहुत बढ़िया
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कविता के भाव को समझने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏
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बहुत ही सुंदर कविता। यूँ ही निरंतर सुंदर तरीके से लिखते रहें।
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Thank you very much Ramesh ji for your nice n valuable compliment.🙏
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दोस्ती के ऊपर बहुत ही सुन्दर कविता
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Thanks for your lovely comment seema
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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बहुत बहुत शुक्रिया मोहन जी
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बहुत खूब
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Thank you very much
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