सामाजिक हत्या

जिसने तुमको जन्म दिया,जिसने तुमको प्यार से पाला,
बेशर्म!तूने उनको अपने कुकर्मो से कलंकित कर डाला।
प्यार किया था,प्रेम विवाह भी तुम कर लेती,
चुपचाप खुशी से अपने पति संग रह लेती।
तुमने तो अपने पिता की सामाजिक हत्या कर दी,
सरे बाज़ार उनकी इज्जत ही नीलाम कर दी।
दुनिया के आगे घड़ियाली आंसू तुम बहाती हो,
पिता से है जान का खतरा यह सबसे बताती हो।
वो तुम्हे क्या मारेगा,जिसे जीते जी तुमने मार दिया,
अपने कुल की मर्यादा को कालिख से तुमने पोत दिया।
तू!अपने माँ-बाप की न हुई,पति की क्या हो पायेगी!
दुनिया होगी साक्षी एक दिन तू दर-दर ठोकर खायेगी।

Comments

10 responses to “सामाजिक हत्या”

      1. nitu kandera

        Ok

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