सावन परिवार अनूठा है

साहित्य एक विधा है
न कुछ दिनों की संविदा है
लिखूं कुछ ऐसा
जिसकी सबको प्रतिक्षा है
कहीं मिले आलोचना
कहीं मिले सुंदर समीक्षा है
अभी मैं हूं एक ‘नन्हीं कलम’
पर आकाश छूने की उत्कंठा है
ना चाहूं किसी से हार जीत
ना कोई प्रतिस्पर्धा है
मिलता रहे सभी का सानिध्य हमें
क्योंकि सावन परिवार अनूठा है
—✍️ एकता

Comments

15 responses to “सावन परिवार अनूठा है”

  1. Chandra Pandey

    जीतने नहीं देंगे वो
    किसी भी तरह हरा देंगे
    सुना सुना कर उलाहना की बातें
    साहित्य को हरा देंगे।

  2. राकेश पाठक

    Nice

  3. Pragya

    सावन परिवार सचमुच अनूठा है तथा आपके आ जाने से सावन और हरा भरा हो गया हमारी इच्छा है कि आपकी लेखनी यूं ही अविरल जलती रहे और आपका प्यार यूं ही मिलता रहे

  4. Pragya

    सावन परिवार में बहुत ही मिठास है हम चाहते हैं कि ये मिठास यूं ही बनी रहे और आपका सानिध्य हमें मिलता रहे।

  5. Pragya

    बिना मन को छोटा किए बिना इधर-उधर की बातें सोचे आप अपनी कलम को अविरल चलाती रहें आपकी कलम अवश्य ही ऊंचाइयों को छुए गी क्योंकि आपकी कलम बहुत ही उत्कृष्ट है

  6. बहुत ही सुंदर विचार

    1. धन्यवाद 

  7. Ekta

    न हारा है, न हारेगा
    कभी भी “साहित्य ”
    गर सुनायेंगें बातें उलाहना की
    अपनी नन्हीं कलम को तलवार
    बना लेंगें

    1. Chandra Pandey

      बहुत सही, अति उत्तम, you are great

  8. वाह वाह, अति उत्तम रचना

    1. सादर अभिनंदन

  9. Amita

    “अभी मैं हूं एक नन्ही कलम, पर आकाश छूने की उत्कंठा है”
    बहुत सुंदर पंक्तिया,ईश्वर से यही कामना है आप अपना लक्ष्य हासिल करें।

    1. धन्यवाद शास्त्री जी

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