सितमगर सितम देता ही रहा
मैं उसे आखिरी समझ कर झेलती रही
वह तो मेरे साथ खेल ही रहा था पर मैं भी
अपने वजूद के साथ खेलती रही…
सितमगर…
Comments
4 responses to “सितमगर…”
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👌👌👌
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वाह, क्या जबरदस्त लेखनी है।
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वाह क्या बात है
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सुन्दर लेखन और सुंदर प्रस्तुति
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