सितमगर…

सितमगर सितम देता ही रहा
मैं उसे आखिरी समझ कर झेलती रही
वह तो मेरे साथ खेल ही रहा था पर मैं भी
अपने वजूद के साथ खेलती रही…

Comments

4 responses to “सितमगर…”

  1. Dimpy Aggarwal2011

    👌👌👌

  2. वाह, क्या जबरदस्त लेखनी है।

  3. वाह क्या बात है

  4. Geeta kumari

    सुन्दर लेखन और सुंदर प्रस्तुति

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