मेरी वफाओं का खुलकर सिला दिया उसने,
न रखा एक भी, हर खत जला दिया उसने..
‘दूर होने का फैसला क्या खुद तुम्हारा है ?’
मैंने पूछा तो कैसे सर हिला दिया उसने..
हमें भी खूब मिली आंसू पोंंछने की सज़ा,
हँसाया जिसको था अब तक, रुला दिया उसने..
गैर हाजिर है मेरे दिल से अब उम्मीद मेरी,
मुझे यकीं है कि मुझको भुला दिया उसने..
मेरी वफाओं का खुलकर सिला दिया उसने,
न रखा एक भी, हर खत जला दिया उसने..
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