सीख लो मुस्कुराना।।

यादों का तो काम है
चले आना
हमारा काम है उन
जलते दीपकों को बुझाना
बुझा दो उन तमाम यादों के
टिमटिमाते चिरागों को
जला लो दिल में नए खयालों को
भूल जाओ और छुपा लो
उन जख्मों को,
जो दर्द दें, रुला दें, मिटा दें तुम्हें
सीख लो तुम किसी की
खातिर मुस्कुराना
दिल के जख्मों को हर एक से छुपाना।।

Comments

3 responses to “सीख लो मुस्कुराना।।”

  1. pravin

    उत्तम सृजन कवियत्री जी

    1. धन्यवाद कवि जी 

      1. स्वागत है 

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