आज अर्ध-निद्रा में ही
कुछ जागने की चेष्टा की
जाने कितनी दूर चलकर
मैं जाने कहाँ पहुँच गई !
अर्द्ध विक्षिप्त अवस्था में,
देखा तो हजारों पुष्प
सोने के सरोवर में स्नान करके
पूजा करने जा रहे हैं
माँ गौरी की पूजा
मैने भी उस स्वर्ण सरोवर में
स्नान किया और
पूजा की,
मन को शांति मिली
सुख की प्राप्ति हुई।।
“सुख की प्राप्ति”
Comments
6 responses to ““सुख की प्राप्ति””
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उत्कृष्ट रचना
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धन्यवाद
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बहुत सुन्दर रचना।
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बहुत खूब
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वाह
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आभार आपका
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