सुलह की बात करने पर
न समझो डर गए हैं हम
बस यही चाहते हैं दूरियां
हो जायें थोड़ी कम।
सुलह की बात करने पर
Comments
6 responses to “सुलह की बात करने पर”
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वाह वाह बहुत खूब पाण्डेय जी
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बहुत खूब बहुत सुन्दर
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वाह वाह अतिसुन्दर
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अतिसुंदर
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लाजवाब✍
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कवि की श्रेष्ठ भावनाएं ।
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