“सुविचारों का पिटारा”

पुरुष नारी से हर एक क्षेत्र में पीछे है
देने में भी और लेने में भी|
कैसे??
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नारी ममता, प्रेम और त्याग देती है अपने रिश्तों को बनाए रखने के लिए….
पर वही नारी जब आक्रोश में आती है तो
बदला लेने में भी पुरुष से अधिक निर्दयी हो जाती है|
“इतिहास गवाह है इस बात का”
तो हो गया ना लेन-देन !
अब पुरूषों को तय करना है कि वह स्त्री को किस रूप में पाना चाहते हैं…

Comments

2 responses to ““सुविचारों का पिटारा””

  1. बहुत सुंदर सुविचार हैं कवि प्रज्ञा जी के..

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