5 Comments

  1. सादर प्रणाम आदरणीय शास्त्री जी, इस बीच थोड़ा स्वास्थ्य खराब हो गया था, इसलिए अनुपस्थिति रही। हम लोग स्वास्थ्य विभाग में हैं, रोगियों के संपर्क में आते रहते हैं, इसलिए बुखार हो गया था। अब आप सबके स्नेह से ठीक है। आपने इतनी सुंदर पंक्तियाँ लिखी। धन्यवाद शब्द बहुत कम है। 🙏🙏

  2. आपकी पंक्तियों से मन हुआ गदगद हमारा,
    इस तरह के स्नेह का भूखा रहा है मन हमारा।
    नेह यह, आशीष यह यूँ ही रहे सिर पर हमारे,
    प्रेम बढ़ता ही रहे यह चाहता है मन हमारा।

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