सूर्य किरण सुधा समान,
पौधों को कराती रसपान
विटामिन डी इनमें विद्यमान,
सूर्य इसीलिए पूजित हैं
जीवनोदक इनकी रश्मियाँ,
प्रदान करें आलोक,
इस लोक को..
सुनहरी किरणों से l
सूर्य के दर्शन हों हर रोज़
यही प्रार्थना है ईश से
______✍गीता
सूर्य किरण
Comments
7 responses to “सूर्य किरण”
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कवि गीता जी की कविता प्रकृति व परिवेश प्रेम के अलावा एक सचेत नागरिक की तरह संदेश देने में सक्षम है। उन्होंने अपने कविता में सूर्य की किरणों की महत्ता को अभिव्यक्त किया है। भाषा व शिल्प दोनों ही उच्चस्तरीय हैं।
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इतनी सुंदर और उत्साहवर्धक समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी
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अतिसुंदर भाव
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सादर धन्यवाद भाई जी🙏
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सूर्य के दर्शन हों हर रोज़
यही प्रार्थना है ईश से-
धन्यवाद विकास जी जय श्री राम
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बहुत-बहुत धन्यवाद विकास जी जय श्री राम
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