*सूर्य-देव का रथ आया*

सात रंग की किरणें लेकर,
सूर्य-देव का रथ आया
सूर्य-रश्मि की सौगात लेकर,
रौशन करता पथ लाया
नई आशाएं लाता है प्रतिदिन,
जीवन कुछ नहीं,आशा के बिन
आशा पर ही दुनियां अडिग है,
ये सुखद संदेशा है लाया
सात रंग की किरणें लेकर,
सूर्य-देव का रथ आया
तम से घबराया,जब जग सारा,
सूर्य-रथ लाया दिवस सुनहरा
लाल,पीली,बैंगनी आदि किरणों से,
फैलाया है उजियारा
नभ की आभा का, सौन्दर्य देखो
उषा-काल की बेला में,
अम्बर पर लालिमा छाई
नई उमंग लेकर आई अंशु,
मानो मेला सा है आया
सात रंग की किरणें लेकर
सूर्य-देव का रथ आया,

*****✍️गीता

Comments

8 responses to “*सूर्य-देव का रथ आया*”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    वाह वाह बहुत सुंदर भाव

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏

    1. Geeta kumari

      Thanks

  2. उत्तम शब्दावली का प्रयोग एवं सूर्योदय का सुंदर वर्णन

    1. सुंदर समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

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