अब जैसे असहाय, कभी नहीं पहले हुए
कोई लेव बचाय, कोरोना यमराज से
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उजड़ रहे परिवार, कहाँ गए भगवान् तुम
रोता है संसार, वैग्यानिक विचलित दिखे
सोरठा छंद
Comments
3 responses to “सोरठा छंद”
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यथार्थ चित्रण किया है भावपक्ष प्रबल है
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वाह
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यथार्थ चित्रण
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