सौगात माँगता है

मेरी जान तुम्हारे जान का सौगात माँगता है।
ये जान लिया, जब जान मेरी ,
ले जान हथेली दिन-रात माँगता है। ।
लाँघ नफ़रत की दरिया मुश्कत से
इश्क का एक सरोवर आबाद माँगता है।
बीत जाएगी ये रात काली
ऐ ‘विनयचंद ‘ जुगनू -सी औकात माँगता है।।

Comments

6 responses to “सौगात माँगता है”

  1. बहुत खूब, शास्त्री जी, वाह वाह

    1. शुक्रिया जनाब राम राम जी

  2. बहुत लाजवाब

  3. बहुत अच्छी कविता

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