स्वयंभू

आज खुश तो बहुत होगे तुम
आखिर बो ही दिया
तुमने नफरत का बीच
उगल दिया अपनी जुबान का विष
स्वयं को स्वयंभू समझते हो
ना जाने क्या समझते हो??

Comments

4 responses to “स्वयंभू”

  1. राकेश पाठक

    What isthis

    1. Pragya

      यह मुक्तक है भावपूर्ण मुक्तक

    1. धन्यवाद 

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