तुमने बसा ली अपनी दुनिया
मुझे तो किसी छत का भी सहारा नहीं
चाह कर भी मैं तुम्हारा हाल ना पूछ सकू
कहीं कह दो की अब ये हक तुम्हारा नहीं.
हक
Comments
16 responses to “हक”
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Mice
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धन्यवाद
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Welcome
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Dhnyawad
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कोई बात
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Sorry nice
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धन्यवाद
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धन्यवाद
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Sunderr
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थैंक्स
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Nice
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थैंक्स
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Good
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थैंक्स
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वाह
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थैंक्स थैंक्स
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