हक़दार क्यूँ नहीं

प्यार न सही
प्यार के बोल क्यूँ नहीं
चाँद अपना न सही
चाँदनी के हकदार क्यूँ नहीं ।।
दूर बहुत हो तुम
जिन्दगी में संग नहीं
साथ हो यह
कम अनमोल तो नहीं ।।

Comments

8 responses to “हक़दार क्यूँ नहीं”

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  1. Sandeep Kala

    बहुत ही सुंदर

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

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