प्यार न सही
प्यार के बोल क्यूँ नहीं
चाँद अपना न सही
चाँदनी के हकदार क्यूँ नहीं ।।
दूर बहुत हो तुम
जिन्दगी में संग नहीं
साथ हो यह
कम अनमोल तो नहीं ।।
हक़दार क्यूँ नहीं
Comments
8 responses to “हक़दार क्यूँ नहीं”
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Very nice
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बहुत बहुत धन्यवाद
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Beautiful
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बहुत बहुत धन्यवाद
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बेहतरीन
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बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत ही सुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद
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