हमारी धरती मां

गेंद जैसी गोल
धरोहर है अनमोल
थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है
सभी जीवो अपने अंचल में बसाती है इसीलिए तो यह धरती माता कहलाती है
लेकिन कई दिनो से है बीमार
थकी नहीं ढोकर जग का भार
डिप्रेशन में चली गई है देख कर अपने पुत्र का बदला हुआ व्यवहार

Comments

2 responses to “हमारी धरती मां”

  1. बहुत सुंदर

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