मुस्किल हुआ दिल को समझाना
मुस्किल हुआ रूठोंं को मनाना
कितना बदल गया ये ज़माना
पर हम ना बदल पाएँ
पर हम ना बदल पाएँ
तुझसे बिछड़ के ज़िंदा हूँ ये मेरी फूटी किस्मत है
मिले दो दिल तो जुदा कर देना ये दुनियाँ की फितरत है
मुझसे जुदा होके सम्हल गए तुम
पर हम ना सम्हल पाएँ
कितना बदल गया ये ज़माना
पर हम ना बदल पाएँ
हम ना बदल पाएँ
Comments
13 responses to “हम ना बदल पाएँ”
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वाह बहुत सुन्दर
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धन्यवाद
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Nice
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धन्यवाद
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Wah
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धन्यवाद
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Achcha kavita
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धन्यवाद
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वाह
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धन्यवाद
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Nice
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वाह बहुत सुन्दर
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Good
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