हम समझ न पायेंगे

आपकी बात ऐसे
हम समझ न पायेंगे
जरा सा खुल के कहो
खुल के बता जायेंगे।
दिल में तूफान है पर
आग अब बुझी सी है,
आप चाहो तो उसे
और जला लायेंगे।
ठंड है खूब और
आप भी बुझे से हैं
आग लायेंगे आपको
भी तपा जायेंगे।
आप मुँह मोड़ लो
पूरी तरह भले हमसे
मगर हमें न कभी
आप भुला पायेंगे।

Comments

15 responses to “हम समझ न पायेंगे”

    1. सादर धन्यवाद, शास्त्री जी

  1. बहुत सुन्दर जबरदस्त कविता लिखी है।

  2. माह के सर्वश्रेष्ठ कवि घोषित होने की बहुत बहुत बधाई है सर

    1. इस स्नेह के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

  3. सर्वश्रेष्ठ कवि की पदवीं प्राप्त करने की बहुत सारी बधाईयां

    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी

  4. Geeta kumari

    बहुत सुन्दर पंक्तियां, सुन्दर शिल्प
    और सुन्दर भाव लिए हुए बहुत सुंदर कविता

    1. समीक्षागत सुन्दर टिप्पणी हेतु हार्दिक अभिवादन गीता जी।

  5. Geeta kumari

    सर्व श्रेष्ठ कवि का सम्मान मिलने की बहुत बहुत बधाई सर

    1. बहुत बहुत आभार, साथ ही सर्वश्रेष्ठ आलोचक और सदस्य सम्मान मिलने पर आपको भी हार्दिक बधाई गीता जी

  6. Great, सर्वश्रेष्ठ कवि सम्मान की बधाई।

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