हर शाम

हर पल लगता बहुत सीख लिया
अब जीवन में
भ्रम तोड़ जाती हर शाम इक
नईं शिक्षा दे

Comments

4 responses to “हर शाम”

  1. दो पंक्तियों में पूरा समा बाँध दिया आपने अनू..
    बेहद सुंदर..

  2. Anu Singla

    आभार

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