4 Comments

  1. चार दिन को गँवाना
    गमों में नहीं।
    भीड़ के बीच में
    ख्याल खुद का रखो,
    हर सको दर्द दूजे का
    नुस्खा रखो।
    _______ कवि सतीश जी की अति उत्तम रचना लाजवाब अभिव्यक्ति उम्दा लेखन

  2. भीड़ के बीच में खुद का ख्याल रखो हर सको दर्द दूजे का नुस्खा रखो। बहुत सुंदर अभिव्यक्ति सतीश जी 🙏🏻🙏🏻

Leave a Reply