हाथों की लकीरें

हाथों की लकीरें बनाकर भूल बैठा है,
शायद खुदा मुझसे रूठ के बैठा है,

कहानी में मेरा किरदार ‘गरीब’ लिखकर,
वो मिट्टी से मेरा जीवन जोड़ बैठा है॥
राही (अंजाना)

Comments

3 responses to “हाथों की लकीरें”

  1. Nilesh Rajpoot Avatar

    Sir oooosam from nilesh class Vl b

    1. Shakun Avatar

      नीलेश आज 6 बजे के बाद मुखौटा कविता पे कमेंट करना

  2. Abhishek kumar

    Good

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