हाथ में रेखा
रेखा में जीवन
जीवनt रेखा हाथ में।
पर है जीवन
और मरन
एक ईश्वर के हाथ में।।
हाथ मिलाने से पहले
सोच लो एक बार।
वायरस और बैक्टीरिया
है बीमारी के आधार।।
गर मिलाया
फिर सेनिटाइज करो।
हाथ मूंह छूने से पहले
पहले यही रिभाइज करो।।
महामारी है कोरोना
अपना खुद बचाव करो।
हाथ में है जीवन तेरे
अच्छा नित बरताव करो।।
हाथ में जीवन
Comments
8 responses to “हाथ में जीवन”
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हाथ में रेखा
रेखा में जीवन
जीवन रेखा हाथ में।
पर है जीवन
और मरन
एक ईश्वर के हाथ में….महामारी है कोरोना
अपना खुद बचाव करो।
हाथ में है जीवन तेरे
अच्छा नित बरताव करो।।
______ कवि विनय चंद शास्त्री जी की अति उत्तम रचना, इसमें उन्होंने बताया है बेशक जीवन मरण ईश्वर के हाथ में है, लेकिन आजकल के कोरोना के माहौल में जीवन मरण कुछ हद तक अपने हाथ में भी है। कोरोना महामारी से बचाव के लिए उचित संदेश देती हुई अति उत्तम रचना , उम्दा लेखन।-
शुक्रिया बहिन
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महामारी है कोरोना
अपना खुद बचाव करो।
हाथ में है जीवन तेरे
अच्छा नित बरताव करो।।
— बहुत सुंदर पंक्तियाँ और लाजवाब कविता है। वाह वाह-
बहुत बहुत धन्यवाद पाण्डेयजी
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बहुत सुंदर कविता
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बहुत बहुत धन्यवाद श्रीमान
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बहुत खूब
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हाथ में रेखा
रेखा में जीवन
जीवनt रेखा हाथ में।
पर है जीवन
और मरन
एक ईश्वर के हाथ में।।
हाथ मिलाने से पहले
सोच लो एक बार।
वायरस और बैक्टीरिया
है बीमारी के आधार।।बहुत ही सुंदर पंक्तियां
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