हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि की,
आप सबको शुभकामनाएँ।
यही है नववर्ष हमारा,
यही जीवन में खुशियाँ लाए।
एक जनवरी को क्या हुआ,
क्या ऋतु बदली कोई?
या बदला कोई मौसम।
क्या फ़सल बदली?
या बदला कोई नक्षत्र।
पेड़ पौधों की रंगत वही थी,
चाॅंद सितारों की दिशा वही।
फ़िर भी एक जनवरी को,
हम दें नववर्ष की बधाई।
नव वर्ष के नए दिन की,
कुछ तो अलग अनुभूति हो।
चैत्र मास में नए फूल खिले हैं,
वृक्षों पर नए पल्लव मिले हैं।
हरियाली छाई चहुँ ओर,
मानो प्रकृति मना रही है,
नववर्ष की नई भोर।
वही वस्त्र दिसंबर में वही वस्त्र जनवरी में,
चैत्र मास में सर्दी जाती गर्मी आती।
मौसम बदला चैत्र मास में,
विद्यालयों में नया सत्र है चैत्र मास में,
बैंक के खातों की क्लोजिंग चैत्र मास में।
जनवरी में नया कैलेंडर आता है,
लेकिन चैत्र मास में आए नया पंचांग।
उसी के अनुसार ही,
भारतीय पर्व और विवाह आदि के मुहूर्त का,
होता है व्यवधान।
हम शुभ मुहूर्त देखकर ही करते हैं जो कार्य,
मिलती है उसमें सफ़लता बेशुमार।
चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा ही, है हमारा नया साल।
यही है हमारे लिए शुभ और बेमिसाल।
हम अपना नववर्ष मनाते देवी माँ के पूजन से।
कितनी सुन्दर है संस्कृति हमारी,
हृदय प्रसन्न है माँ के आगमन से॥
_____✍गीता
हिन्दू नववर्ष की नई भोर
Comments
6 responses to “हिन्दू नववर्ष की नई भोर”
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बहुत सुंदर रचना
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बहुत-बहुत धन्यवाद पीयूष जी
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हम अपना नववर्ष मनाते देवी माँ के पूजन से।
कितनी सुन्दर है संस्कृति हमारी,
हृदय प्रसन्न है माँ के आगमन से॥
——- बहुत ही सुन्दर और लाजवाब रचना है। हार्दिक शुभकामनाएं-
उत्साहवर्धक और प्रोत्साहन देती हुई सुंदर समीक्षा के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी। हिंदू नव वर्ष और नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
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अतिसुंदर रचना
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सादर धन्यवाद भाई जी🙏
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