हे कान्हा ! मैं तेरी जोगन
जोग ना छूटत मेरो
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रोम-रोम में बसत है तेरो
प्रेम अनमोल रतन
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हे कान्हा ! मैं तेरी जोगन
जोग ना छूटत मेरो
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माखनचोर चोर तू है चीतचोर
बंसी मधुर बजायो
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प्रीत में तेरी राधा नाचत
ये कैसो रोग लगायो
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मोहे रिझा कर गोपिन के संग
काहे रास रचायो
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कित मेरी गई चूनर धानी
कित नथुनी हेरायो
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सुध-बुध खोकर नाचत
ब्रजवासी कैसो जोग लगायो?????
हे कान्हा! मैं तेरी जोगन
Comments
11 responses to “हे कान्हा! मैं तेरी जोगन”
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जय कन्हैया लाल की
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🌹🌹🌹
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Sundar rachna
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धन्यवाद
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Nice
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धन्यवाद
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Nice
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Thanks
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Nyc
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थैंक्स
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बहुत ही उम्दा रचना
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