होता

काश! मेरे चाहने भर से मेरे पास वो होता ।
खुद से जाग कर के वो मुझी में सो गया होता ।
दौलतें सारे जहाँ की मैं लुटा देता उसी पर गर,
ज़रा सा मुस्करा कर उसने मुझको खरीद लिया होता ॥

निहायती खूबसूरत रूप ना आँखों में बसाया होता ।
नयन अंकित समर्पित भाव, काश! उसने भी पढ़ा होता ।
गौर करता वो भी मेरी बाते, मेरी आदते, फरियादें,
उसने मुझसे तो क्या, खुद से ही प्यार कर लिया होता ॥

लड़कपन मुझ में भर आया, हुआ तहलका-ए-स्वांग ।
लता ने कल्प मन भरमाया, हुआ तहलका-ए-स्वांग ।
सबने खुद को खलनायक माना, पढ़कर किस्सा मुहब्बत का,
मैं उसी किस्से का नायक बन गया, हुआ तहलका-ए-स्वांग ॥

Comments

9 responses to “होता”

  1. Payal sharma Avatar
    Payal sharma

    Awesome poem!

    1. अंकित तिवारी Avatar

      Thanku….. Ur comment has motivated me a lot,..

      1. Satish Pandey

        वास्तव में सराहनीय

  2. amit sharma Avatar
    amit sharma

    loved your poetry 🙂

    1. अंकित तिवारी Avatar

      Inspite of loved,,,, I would love to read loving…. :p

  3. Sanjeev Bajaj Avatar
    Sanjeev Bajaj

    Heart touching poetry

  4. राम नरेशपुरवाला

    Good

  5. Satish Pandey

    वाह क्या बात है

Leave a Reply

New Report

Close