होली में हम रम गए
पूछ न पाये बात,
कैसे हो कितना लगा
रंग बताओ आज।
रंग बताओ आज
कौन सा रंग लगा है,
प्रेम और माधुर्य
आज हर अंग सजा है
कहे लेखनी रंग
रंगा हो जीवन का पल
यही मिले आपको
अद्भुत होली का पल।
होली में हम रम गए
Comments
8 responses to “होली में हम रम गए”
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कहे लेखनी रंग
रंगा हो जीवन का पल
यही मिले आपको
अद्भुत होली का पल।
________ होली के पावन पर्व पर अपने खूबसूरत विचार रखती हुई, कवि सतीश जी की छंद शैली में बहुत ही खूबसूरत रचना लाजवाब अभिव्यक्ति, अति उत्तम लेखन -

nice thought
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वाह अति उत्तम
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वाह
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Great
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अतिसुंदर भाव
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बहुत सुंदर कविता
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बहुत खूब अति उत्तम कविता
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