रंगमंच

दुनियाॅं के रंगमंच पर,
हम सभी आते हैं
अपना-अपना किरदार निभाने,
किरदार निभाते-निभाते
भूल ही जाते हैं..
कि एक दिन इस रंगमंच से,
जाना है एक दूसरी दुनियाँ में,
यहां रहकर जो मिला है किरदार,
वह निभाना है
अपना एक स्थान बनाना है,
और फिर इस रंगमंच से
चले जाना है,
यही है जीवन..
और जीवन का रंगमंच…
____✍गीता

विश्व रंगमंच की हार्दिक शुभकामनाएं

Comments

15 responses to “रंगमंच”

    1. Geeta kumari

      Thank you

      1. वेलकम

  1. बहुत शानदार कविता

    1. Geeta kumari

      Thanks for your precious compliment Piyush ji

  2. वाह वाह अति उत्तम

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद कमला जी हार्दिक आभार

  3. Satish Pandey

    अपना एक स्थान बनाना है,
    और फिर इस रंगमंच से
    चले जाना है,
    यही है जीवन..
    और जीवन का रंगमंच…
    ——- बहुत सुन्दर, जीवन दर्शन से जुड़ी और सच्ची बात कहती बहुत सुंदर कविता। लेखनी को सैल्यूट।

    1. Geeta kumari

      इतनी सुंदर और प्रेरक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी, अभिवादन सर

  4. बहुत सुंदर

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद सर

  5. vikash kumar

    अपनी किरदार निभाने ही पड़ेंगे
    जो लिखा हैं वो होना ही हैं
    सब मौन ना हो सकते जहां में
    कुछ कोलाहल भी जरूरी है
    ++++++++++++++++++++
    बुरा नहीं हैं कोई जहां में
    सब हरि- खिलौना हैं
    सबका अपना अपना पाठ हैं
    सबको वहीं निभाना हैं

    1. Geeta kumari

      सुंदर समीक्षा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद विकास जी

    1. सादर आभार भाई जी🙏

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