कविता – हौसला रख आगे बढ़
(रोला छंद का रूप- मात्रा 11-13)
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मंजिल पानी है तो, हौसला रख आगे बढ़,
विचलित मत हो किंचित, जीत का स्वाद तू चख।
अपने को कमजोर, समझ कर भूल न कर तू,
शक्ति जगा भीतर की, केवल सत्य से डर तू।
निडर वीर तू जगा, उमंग को अपने भीतर,
पा लेने की मुखर, आग हो तेरे भीतर।
राह भरे कंकड़ हों, तब भी तेज ही चल ले,
मंजिल तेरे आगे, मंजिल को अपनी कर ले।
————- डॉ0 सतीश पाण्डेय
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