26 जनवरी पर ( गरम दल की शायरी )

शोर बहुत है बाहर.. कि अंदर चुप ; अब रहा नहीं जाता !
क्या कहूँ उन बहरों से
इस दिल की बात..
बिना धमाके के जिनको कुछ समझ नहीं आता !! :- प्रेमराज आचार्य


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4 Comments

  1. Kanchan Dwivedi - January 24, 2020, 12:15 am

    Good

  2. Abhishek kumar - January 24, 2020, 12:19 am

    Nice

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 24, 2020, 7:55 am

    सुंदर

  4. NIMISHA SINGHAL - January 28, 2020, 9:49 am

    🌺🌺👌👌

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