मिलती गर इज़ाज़त, थोड़ी सी मोहलत मांग लेता |
पिंजरे की दाल छोड़कर, आसमानों की भांग लेता ||
चल पड़ता जहाँ बढ़ते कदम, मुड़ता बस नज़र की ओर |
उतार देता थैला काँधे से , नौकरी खूंटी पर टांग देता ||
4 Liner#1
Comments
5 responses to “4 Liner#1”
-
umda kavya Vikas ji
-

nice lines
-

Thanks Mohit ji and Kapil ji…
-

Good
-
मिलती गर इज़ाज़त, थोड़ी सी मोहलत मांग लेता |
पिंजरे की दाल छोड़कर, आसमानों की भांग लेता ||
कितनी सुन्दर पंक्तियाँ लिखी हैं आपने
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.