4 Liner#1

मिलती गर इज़ाज़त, थोड़ी सी मोहलत मांग लेता |
पिंजरे की दाल छोड़कर, आसमानों की भांग लेता ||
चल पड़ता जहाँ बढ़ते कदम, मुड़ता बस नज़र की ओर |
उतार देता थैला काँधे से , नौकरी खूंटी पर टांग देता ||

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4 Comments

  1. Kapil Singh - November 12, 2015, 12:54 pm

    umda kavya Vikas ji

  2. Mohit Sharma - November 12, 2015, 12:55 pm

    nice lines

  3. Vikas Bhanti - November 12, 2015, 1:30 pm

    Thanks Mohit ji and Kapil ji…

  4. राम नरेशपुरवाला - September 12, 2019, 12:46 pm

    Good

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