बस प्यार चाहिए

हथियार न बन्दूक न तलवार चाहिए ,

इंसान से इंसान का बस प्यार चाहिए.

है बंद गुलिस्ता ये मुद्दतो से मीर,
इस में फकत गुल ओ बहार चाहिए.
नेकी की राह बड़ी बेरहम है ना,
नेकी के मुसाफिर को तलबगार चाहिए.
न भीड़ हो अन्धो की,गूंगो की,और बहरों की यहाँ,
जो हो शरीफ उनका मुश्कबार चाहिए.

ये इश्क की सजा है या तूणीर का कहर ,
ये तीर इस जिगर के आर पार चाहिए.
ग़मगीन जो समां हो मेरा नाम लेना मीर ,
चेहरे पे ख़ुशी और दिल में प्यार चाहिए.

….atr

Comments

6 responses to “बस प्यार चाहिए”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Wah

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar
    महेश गुप्ता जौनपुरी

    बहुत सुंदर ढ़ेरो बधाई

  3. Abhishek kumar

    Wow

  4. Kanchan Dwivedi

    Such a great poetry by you,👏👏👏👏👏👏👏

  5. Satish Pandey

    वाह वाह

  6. Satish Pandey

    अतिसुन्दर

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