“प्रतिभाओं का धनी”

????????
————————-
प्रतिभाओं का धनी
—————————

सत्य-बोध के मूल-बीज को
प्रकृति ने स्वयं निखारा है
प्रतिभाओं का धनी आदि से
भारत-वर्ष हमारा है

श्वर-व्यञ्जन को गढ़कर हमने
शब्द, वाक्य मे ढ़ाल दिया
मन की अभिव्यक्ति ने
पहली-भाषा रूपी ‘भाल’ लिया
“पाणिनि” की कल्पना ने ध्वनि का
सूत्रवत रूप संवारा है
प्रतिभाओं का धनी आदि से
भारत-वर्ष हमारा है |

काल-गति जब मापी हमने
नाड़ी-पल गति-मान मिला
सूक्ष्म चाल पर चिन्तन करते
कल्प-ज्ञान का फूल खिला
कल्पतरू तरुवर की लट से
बही कल्पना-धारा है
प्रतिभाओं का धनी आदि से
भारत-वर्ष हमारा है |

सून्य अंक देकर हमने ही
अंको को विस्तार दिया
विन्दु दशमलव से अनन्त
दूरी का साक्षातकार किया
बंधा समय और गति की लय से
हर ब्रम्हाण्ड नजारा है
प्रतिभाओं का धनी आदि से
भारत-वर्ष हमारा है |

अभिमन्यु ने गर्भ मे भेदन
व्यूह को जितना जान लिया
उस क्षमता को मानव भूल ने
आगे का न ज्ञान दिया
समय कषौटी ने निर्दोष का
आधा ज्ञान नकारा है
प्रतिभाओं का धनी आदि से
भारत-वर्ष हमारा है |

परहित से सद्भाव के आगे
हमने शीश झुकाए हैं
पर-पीड़ा प्रतिकार की खातिर
अपने प्राण गवांए हैं
सच्चाई मे अच्छाई का
वाश है हमने विचारा है
प्रतिभाओं का धनी आदि से
भारत-वर्ष हमारा है |

लक्ष्य-विजय तेरी भारत-माता
मंगलमय द्वारे पे खड़ी
माँ तेरे पावन आँचल में
हर प्रतिभा परवान चढ़ी
सेवा में अवदान ने तेरी
अपना कर्म उतारा है
प्रतिभाओं का धनी आदि से
भारत-वर्ष हमारा है |

सत्य-बोध के…
प्रतिभाओं का…

…अवदान शिवगढ़ी
०७/१०/२०१४ टी.पी. नगर, इन्दौर ०९:१८ प्रातः

Comments

2 responses to ““प्रतिभाओं का धनी””

  1. Satish Pandey

    Good

Leave a Reply

New Report

Close