सपना

काश सपना मेरा ये हकीकत हो जाए,
मैं बाहर और तू यूँही अंदर हो जाए,
रख कर बर्तन में तुमने मुझे बहुत सताया है,
अब तुमको भी सताने की कुछ खुरापात हो जाए,
खेले हो खेल तुम मुझे फंसाकर साहिब,
अब तुमको फांस कर भी एक खेला हो जाय, काश ये सपना मेरा हकीकत हो जाए तो कैसा हो जाए॥

राही (अंजाना)

Comments

8 responses to “सपना”

  1. Puneet Mt Avatar

    लाजवाब।।।।।

    1. Shakun Saxena Avatar

      धन्यवाद जी

      1. Abhishek kumar

        👏👏👏

  2. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

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