बहु

उस पल को तो आना ही था,
तुझको विदा हो जाना ही था,
ये रीती रिवाजों की ज़ंज़ीर थी,
जिसमे तुझे बन्ध जाना ही था,
बेटी रही तू मेरी जान से प्यारी,
तुझको बहु बन जाना ही था।।
राही (अंजाना)

Comments

5 responses to “बहु”

  1. Satish Pandey

    Nice

  2. Abhishek kumar

    गुड

  3. Pragya Shukla

    बहुत ही सुंदर कहा आपने

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