हाँ,, मैंने लोगो को बदलते देखा हैं!!

हाँ,, मैंने लोगो को खुद में ही बदलते देखा हैं!!
उनके जज्बाती हम को अहम बनते देखा हैं,
कल तक जो सबको साथ लेकर चलने की बात करते थे,,,
आज उनके खिलाफी ख्वाबो को भी अनाथ होते देखा हैं!!

गलत सोचता था कि नाराजगी,,
होती हैं चाँद लफ्जो की दगावाजी,,
उनके प्यारे सावन से मिलकर जाना,,
ये तो सुनामी की हैं कलाबाजी!!
मगर सुनामी से ही सागर को उझड़गते देखा हैं,,
हाँ,, मैंने लोगो को खुद में ही बदलते देखा हैं!!

तुझे भी दगा देना हैं तो शौक से दे दिल,,
हम तो साँसों से भी काम चला लेंगे,,
घुट घुट कर जी जाऊंगा मैं इतना कि,
सावित्री की याद यमराज को दिला देंगे!!
अधूरेपन से खुद को आबाद होते देखा हैं,,
हाँ,, मैंने लोगो को खुद में ही बदलते देखा हैं!!

Comments

8 responses to “हाँ,, मैंने लोगो को बदलते देखा हैं!!”

  1. Pankaj Soni Avatar
    Pankaj Soni

    जो कभी झुकते नहीं थे , प्यार पाने सजदों मे उन्हें झुकते देखा है….
    हाँ , मैंने लोगोँ को ख़ुद में बदलते देखा हैँ…..

    Bht bdia lines hai , bhai …keep it up

  2. Anirudh sethi Avatar
    Anirudh sethi

    wah ji wah..kya kavita he..

  3. Mohit Sharma Avatar
    Mohit Sharma

    umeedo ko zindagi me jalte dekha he
    haan mene logo ko badalte dekha he 🙂

  4. Kapil Singh Avatar
    Kapil Singh

    aankon me aks khinchti hui kavita likh di aapne…keep it up

  5. anupriya Avatar
    anupriya

    carefully crafted poetry..nice

  6. अंकित तिवारी Avatar
    अंकित तिवारी

    Thanks everyone

  7. Satish Pandey

    तुझे भी दगा देना हैं तो शौक से दे दिल,,
    हम तो साँसों से भी काम चला लेंगे,,
    वाह वाह

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