तराश लेता हूँ सामने वाले की फितरत ...... बस एक ही नज़र में ..... जब कलम लिख देती है , हाल - ए - दिल .... तो कोई फ़र्क नहीं रहता ..... जिंदगी और इस सुख़न - वर में....

12 Comments

  1. मेरे माधव ही नहीं आप सब …
    राह – ए – क़ामयाबी में , मेरी तरह एक मुसाफ़िर भी हो ….
    भरने फ़लक – ए – क़ामयाबी पर ऊंची उड़ान ……
    मेरे संग उड़ने वाले तायर हो ……gazab yaar

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