मोहब्बत से नफरत तक आने में, वक़्त तो लगता है;
जागती आँखों को सुलाने में वक़्त तो लगता है!!
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इतनी जल्दी कहाँ से सीखा, तुमने रक़ीबों-सा हुनर;
अपने महबूब को रुलाने में, वक़्त तो लगता है !!
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अब ऐसी भी क्या जल्दी थी, हमसे दूर जाने की;
और जा ही चुके हो, तो भुलाने में वक़्त तो लगता है!!
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हम भी वक़्त दे रहे हैं सबको, आस्तीनों से निकलने का;
अभी तो ख़ुद से रूठे हैं, मनाने में वक़्त तोलगता है!!………#अक्स
“वक़्त तो लगता है !!”
Comments
12 responses to ““वक़्त तो लगता है !!””
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Waqt to lagata he….bahut khoob
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beshaq bhai……shukriya bhai….:)
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nice…beautiful poem ankit 🙂
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thanks a ton……….!! 🙂
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Nice one 🙂
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thank uuu:)
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वक़्त तो लगता हैँ , सही फ़रमाया आप ने .
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बहुत-२ शुक्रिया भाई…… 🙂
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too nice
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thank uuu Sachin bhai 🙂
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बहुत ही उम्दा
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Waah waah
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