7 Comments

  1. nice poem 🙂
    इक सच है जो मैने कभी कहा नहीं
    इक शख्स है जो कभी मुझमे रहा नहीं
    सच यही है कि सच कभी मुझमे रहा नहीं
    यही है सच कि कभी मैं जीया नहीं

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