जम जाते है क्यों रिश्ते बर्फ़ की तरह

सोचता हूं कभी कभी
क्यों हो जाते है शुष्क
जम जाते है क्यों रिश्ते
बर्फ़ की तरह

लेकिन तभी लुड़क पडते है
गर्म गर्म आंसू
नर्म रुखसारों पर
पिघल जाती है सारी बर्फ़
रिश्तों की |

Comments

5 responses to “जम जाते है क्यों रिश्ते बर्फ़ की तरह”

  1. Ankit Bhadouria Avatar
    Ankit Bhadouria

    bht khubsurat ehsaas……..waah!!

  2. Panna Avatar
    Panna

    nice one priya!

  3. Anjali Gupta Avatar
    Anjali Gupta

    nice one priya 🙂

  4. Satish Pandey

    सोचता हूं कभी कभी
    क्यों हो जाते है शुष्क
    जम जाते है क्यों रिश्ते
    बर्फ़ की तरह
    वाह वाह

Leave a Reply

New Report

Close