आँखों ही आँखों में, जाने कब बड़ी हो जाती है
देखते ही देखते, वो घड़ी भी आ जाती है
न चाहते हुए भी, अपने दिल के टुकड़े को
खुद से जुदा करने की, बारी आ जाती है
कैसा होता है ये पल, उस पिता के लिए
बस अंदर ही अंदर भावनाएँ, दबा दी जाती हैं
कल जिस घर आँगन, खेलती कूदती थी
आज उसी आँगन से विदा की जाती है
लड़ती थी ,जिन चीजों के लिए
आज बिन बोले, यूँ ही छोड़ जाती है
रोने न देती थी, किसी को भी एक पल
आज सबको रोता बिलखता, छोड़ चली जाती है।।
आँखों ही आँखों में
Comments
14 responses to “आँखों ही आँखों में”
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Wow!
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थैंक यू
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Nice
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Thank u
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Nice
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थैंक्यू
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मार्मिक
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भावनाशील
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Heart tuching
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सच्ची में!
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Hun
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Thank u so much to all of u
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Pyari kavita
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नेहा जी बहुत सुंदर
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