स्मृतियां, विस्मृतियां आती नहीं जाती रही।
हृदय में कोलाहल मचाती रही।
अश्रु मिश्रित सी रातों में,
दुख सुख की बदली छाती रही।
झंकृत ,अलंकृत सी सांसों को,
मधुर बयार महकाती रही।
एक अल्हड़ बाला हृदय में,
अठखेलियां मचाती रही।
स्मृतियां कभी रुदन कभी उल्लास से सराबोर कर,
नव रसों का पान कराती रही।
कभी दुख -सुख के नगमे गाती रही,
कभी धड़कनों का साज़ बजाती रही।
रात भर मुझे ना सोने दिया,
स्मृतियां आती रही जाती रही।
निमिषा सिंघल
स्मृतियां
Comments
13 responses to “स्मृतियां”
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Good
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Dhanyvad
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bahut sundar rachna , bahut acchi hindi hai apki
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Bahut bahut aabhar Archana ji
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अति उत्तम रचना
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Dhanyvad
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Bahut aabhar
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Sundar
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Thank you
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Dhanyvad aapko
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वाह बहुत सुंदर
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Dhanyvad Mahesh Ji
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Dhanyvad aapko
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