विनती

हे घनश्याम गोपाल मुरारी।
मेरी सुधि लो गिरिवरधारी।।

दीनबंधु करुणा के सागर।
भगतबच्छल प्रभु आरतहर।।
जगतपति जगतारनहारी,
मेरी सुधि लो गिरिवरधारी।।

तेरी कृपा बरस रही निश-दिन।
बाहर-भीतर किनमिन किनमिन।।
दो बूंद का चातक ‘विनयबिहारी’,
मेरी सुधि लो गिरिवरधारी ।।

Comments

11 responses to “विनती”

  1. NIMISHA SINGHAL Avatar

    Shri Krishna Govind hare Murari hai naath Narayan Vasudev

    1. सुत पितु बन्धु सखा हमारे हे नाथ नारायण वासुदेव

    1. जय श्री राधे

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