एक बाग में था पेड़ हरियाणा
विशालकाय, सुंदर, मतवाला
बैठा हो जैसे साधना में तपस्वी कोई
सम्पूर्ण, समृद विशाल हृदय वाला.
जागृत हो जाता होते ही सवेरा
जिस पर था सुंदर साथ चिड़ियों का बसेरा
खाकर फल उसके चिड़ियों ने
बीजों को जग में जा बखेरा.
किसी चिड़िया का पहली डाल पर बसेरा
किसी का था ऊंची अटारी पर डेरा
सुंदर चिड़ियों का परिवार बढा
पेड़ दिखने लगा और भी घनेरा.
बीत गए कई साल खुशी से
उड़कर आकर बैठती बस उसी पे
घूमती फिरती सभी खुले आसमान में
चिड़ियों का ना था वास्ता जमी से.
एक दिन ऐसा तूफान आया
पेड़ ऐसा बुरा चरमराया
टूटी कई टहनियां उसकी
चिड़ियों का दिल बहुत घबराया.
घबराई तो है वो प्रकृति की चाल से
दुखी भी है वों सभी पेड़ के इस हाल से
लड़ना पड़ेगा तो वह लड़ेंगी काल से है
पर चिड़ियों का बसेरा ना उड़ेगा कभी तेरी डाल से.
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