दौर

जाने कैसे दौर से गुजर रहा हूँ मैं,
वक़्त के हर मोड़ पे लड़खड़ाता हूँ,
वो बन्दा ही जख्म-ए-संगीन देता है,
जिसको पूरे दिल से मैं अपनाता हूँ ।।
*नील पदम् *

Comments

7 responses to “दौर”

    1. नील पदम्

      आपका आभार व्यक्त करता हूँ

    1. धन्यवाद आपका

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