कभी तो

कभी तो इन गलियों में
आकर तो देखो,
माना बहुत अन्धेरा है ।
शायद तुम्हारे आने से
मेरा जहान रौशन हो जाये।

Comments

31 responses to “कभी तो”

  1. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

  2. Abhishek kumar

    सुन्दर

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