ढोंगी बाबाओं की लीला

ढोंगी बाबा
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पैसा, संतान, विवाह, घर- मकान,
इन्हीं बातों का जाल डाल
लोगों को भरमाते हैं।
हां! कुछ शातिर लुटेरे
चोगा पहन..
ढोंग खूब रचाते हैं।

सीधे साधे लोगों का शोषण कर जाते हैं,
दीक्षा के नाम पर बेटियों को बहकाते हैं,
शारीरिक शोषण कर हत्या फिर करवाते हैं।
हां! यह ढोंगी हत्यारे बन जाते हैं।

साधुत्व के अंशमात्र को छू भी नहीं पाते हैं
छोटे मोटे जादू सीख
परमात्मा बनना चाहते हैं
टिड्डी दल से रोज नए
पैदा हो जाते हैं।
हां! यह साधु नहीं चोंगे में छिपे लुटेरे बन जाते हैं।

लोगों की बुद्धि पर भगवान भी हैरान है!
लोगों को मुझ तक लाने वाले करुणाधीश!
क्या यही मेरी पहचान हैं??

मुझ तक तो मार्ग सीधा
भगवान भी चकराए हैं
बीच में फिर किसने इतने दलाल
लगाए है?
घोर आश्चर्य…

निमिषा सिंघल

Comments

6 responses to “ढोंगी बाबाओं की लीला”

    1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

      नारि मुई गृह संपति नासी। मुंड मुराई भये संयासी।।

  1. Priya Choudhary

    सही कहा

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