मेरे जाने के बाद
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बिखेर दिया है खुद को
इस कदर मैंने …..
कि ….
मैं ना मिल पाऊं गर तुम्हे …
तो ढूंढ लेना मुझे ….
मेरे गीतों और रचनाओं में।
तुम पर प्रेम छलकाती….
कभी नाराज़गी दिखाती….
किसी ना किसी रूप में मिल ही जाऊंगी।
कभी उदासी घेर ले
तो शायद मै गुदगुदा दू रचनाओं में छुप कर हंसा दू तुम्हे!
बेशक तुम गढ़ लेना कुछ किस्से मनचाहे…..
पर पढ़ लेना मेरा प्रेम जिससे तुम खुद को सरोबोर पाओगे।
भीग जाना चाहो गर…
अचानक हुई प्रेम वर्षा से
तो ढूंढ लेना मुझे फिर
मेरी रचनाओं में।
कभी अधूरी सी कोई कहानी सी मै…. कभी पूर्ण पाओगे,
रचनाएं पढ़ कर जब गले लगाओगे।
मै हमेशा काव्य सुगंध बन महकती रहूंगी
तुम्हारे आसपास..
अपनी रचनाओं में
रजनीगंधा के पुष्प की तरह
तुम जब भी मेरी महक से मदहोश होना चाहो…
तो फिर ढूंढ लेना मुझे!
मै तुम्हे फिर वहीं मिलूंगी..
अपने गीतों और रचनाओं मै
गाती गुनगुनाती
तुम पर प्यार लुटाती।
निमिषा सिंघल
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