चमक रहा चांद पूनम का
जगमग आज आंगन है।
प्रफुल्लित हर कण वसुधा का
सुहानी रात साजन है।।
हृदय के कुंज में प्रीतम
सजाया सेज फूलों का।
नयन पथ से उतर आओ
नहीं है आतंक शूलों का।।
पाक हो दिल दिलवर का
नहीं जन्नत से कम होता।
‘विनयचंद ‘प्रेम की दुनिया
नंदनवन के सम होता।।
नंदनवन
Comments
6 responses to “नंदनवन”
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Nice
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Thank you
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ati sunder
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Shukria
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Nyc
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Good
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